पारिजात या हरसिंगार फूल का संक्षिप्त वर्णन - TheMasterJi.com

पारिजात या हरसिंगार फूल का संक्षिप्त वर्णन

 पारिजात या हरसिंगार फूल का संक्षिप्त वर्णन  

पारिजात का फूल

हम ज‍िसे पौधे की बात करने जा रहे हैं उसे हरसिंगार या फ‍िर पारिजात कहते हैं। इसका वानस्‍पतिक नाम ‘निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस’ है। वहीं, अंग्रेजी में इसे नाइट जैस्मीन भी कहते हैं। कहते हैं क‍ि वनवास काल के दौरान माता सीता पारिजात के पुष्‍पों के हार बनाकर पहनती थीं। इसलिए ही इसका एक नाम श्रृंगार हार भी पड़ा। इसकी उत्‍पत्ति को लेकर कथा म‍िलती है क‍ि इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी और यह देवताओं को मिला था।

  •  पूरी रात सुगंधी बिखेरता पारिजात, भोर होते ही अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है!अलौकिक सुगंध से सराबोर इसका पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करता, अपितु तन को भी शक्ति देता है ! एक कप गर्म पानी में इसका फूल डालकर पियें, अद्भूत ताजगी मिलेगी। 


  • यह पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है। 


  • स्वर्ग में इसको छूने से देव नर्तकी उर्वषी की थकान मिट जाती थी, पारिजात नाम के इस वृक्ष के फूलों को देव मुनि नारद ने श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा को दिया था, इन अदभूत फूलों को पाकर सत्यभामा भगवान श्री कृष्ण से जिद कर बैठी कि पारिजात वृक्ष को स्वर्ग से लाकर उनकी वाटिका में रोपित किया जाए!


  • सत्यभामा की जिद पूरी करने के लिए जब श्री कृष्ण ने पारिजात वृक्ष लाने के लिए नारद मुनि को स्वर्ग लोक भेजा तो इन्द्र ने श्री कृष्ण के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और पारिजात देने से मना कर दिया, जिस पर भगवान श्री कृष्ण ने गरूड पर सवार होकर स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर दिया और परिजात को प्राप्त कर लिया, श्री कृष्ण ने यह पारिजात लाकर सत्यभामा की वाटिका में रोपित कर दिया!


  • भगवान श्री कृष्ण ने पारिजात को लगाया तो था सत्यभामा की वाटिका में, परन्तु उसके फूल उनकी दूसरी पत्नी रूकमणी की वाटिका में गिरते थे, एक मान्यता के अनुसार परिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुन्द्र मंथन से हुई थी, जिसे इन्द्र ने अपनी वाटिका में रोप दिया था!


  • यह वृक्ष एक हजार से पांच हजार वर्ष तक जीवित रह सकता है, पारिजात वृक्ष के वे ही फूल उपयोग में लाए जाते है, जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते है, यानि वृक्ष से फूल तोड़ने की पूरी तरह मनाही है!


  • यह वृक्ष आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है, साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी भगाता है,इस उपयोगी वृक्ष को अवश्य ही घर के आसपास लगाना चाहिए।

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